Saturday, 21 October 2017

Longewala battle field Rajasthan

Not so close though but still witnessed today the very spot where in 1965 our indian army gave a strong lesson to the intruders... made them to leave the place or die...
The place where one day (52 yrs ago) bullets and canons were on their peak performance... destryong...
I was there today...Kind of imagining it all alive... and feel how would it be for them who were there to start, execute and stop...
I was there today..!

Saturday, 14 October 2017

Saturday, 23 September 2017

अमृतसर... तेरे साथ था मैं यहां कल!

अगर कोई ख्वाहिश थी मेरी तेरे साथ कहीं ज़रूर जाने की...तो वो बस अमृतसर जाने की ।
तूने ही सलाह भी दी थी कि चलते हैं...
कोशिश की तुझे मनाने की ताकि ये जो वादा एक क़िस्म का हमने किया था एकदूसरे से वो पूरा कर लें मगर ...वक़्त भी कुछ ऐसा रहा और सोच भी कि शायद यही ठीक है... गए नहीं...

वो होता है ना कि चीजें खुदबखुद होती जाती हैं...मैं गया, और तुझे याद भी किया वहां बैठ के मैंने...
अकेला नहीं था मैं मगर फिर भी था...क्योंकि तुझे अपने साथ सोच कर कुछ और सोचना बस की बात नहीं है मेरे।
चाँद आसमान में कुछ बादलों से घिरा हुआ था...और वो मंदिर का गुम्बद सोने में जड़ा हुआ...पानी की लहरों में हिल हिल कर झिलमिला रहा था। बस मेरी आँखों से देख ले जैसे मैन बयां किया है कुछ इस वक़्त को। गुरबानी जो सूफिया अंदाज़ में लोग गा रहे होते हैं वो इस जगह की खूबसूरती को बरकरार रखने में अहम है।

लाखों लोग होते हैं वहां मो2...मगर जो मुझे महसूस हुआ वो ये कि तू है...और तूने मेरा हाथ ज़ोर से थाम रखा है।
ये ही करना भी था हमें अगर हम एक साथ गए होते तो...और मुझे ये भी मालूम है कि तेरा सर मेरे कंधे पे टिका ज़रूर होता।
मुझे विश्वास नहीं है किसी भगवान या किसी आसमानी सल्तनत में...बस यूं है कि यहां आकर मुझे सुकून मिलता है सिर्फ शांत बैठ जाने में। वो भी इसलिए क्योंकि लोग बड़ी उम्मीद रखते हैं यहां आकर ।

मैं ऐसी जगहों पर सिर्फ तुझे याद कर लिया करता हूं, और अगर आत्माएं होती हैं तो वो बस ये ही एहसास कर पाएंगी कि तेरे बारे में कुछ मन ही मन कुछ कहा है मैंने।

तेरे साथ था मैं यहां कल !

Tuesday, 19 September 2017

तू याद है ज़िन्दगी भर के लिए

सोचा कि कुछ लिखूं तुझे...लिखा और मिटा दिया।।।

Wednesday, 6 September 2017

आजकल

दिन बस यूं ही ढल जाया करता है आजकल, क्योंकि कोई खास वजह नहीं मिलती और तकल्लुफ मैं भी नहीं करता ।
बस ये ही चलता रहता है ज़ेहन में कि तुझे भी तो दिक्कत होगी इस बात से क्योंकि तुझे भी थे आदत मेरी। मुझसे हर रोज़, देर तक बात करने की।

हैरान हूं मैं थोड़ा सा कि वक़्त ने बदल दिया तुझे भी! और खुशी इस बात की है कि तू खुश है इस बदलाव में भी...शायद!
याद कर लिया कर मुझे कभी कभी कुछ अरसे के बाद, शायद मुझे थोड़ा सुकून मिलता रहे बस इस रहमत से तेरी।

Tuesday, 5 September 2017

Growing older...

...Places I've been...N people I've known...
Comes at time to my mind...I'm getting old...Inside...Chasing setting sun...!

Thursday, 3 August 2017

निगाह

आंख झरोखा है जिससे होकर रूह झांकती है बाहर...देखती है और खुश हो जाती है कभी, तो कभी धोखा भी खा बैठती है, क्योंकि जो दिख रहा है शायद वो नहीं निकला जो लगा कि शायद वही है।

आंखे ही हैं जो दिमाग के चलाये चलें और चलाएं भी दिमाग को। देख लेती हैं वो सब जो है सामने और जो दिख रहा है।
मगर कुछ ऐसा भी है जो ना देख पाती हैं और इसी बहाने रो कर साफ हो जाया करती हैं कई मर्तबा। (कई दफा/कई बार)
सुनी है मैंने कहानी उस बच्चे की जिसे सबकुछ, हरकोई अच्छा लगता 

एक बात तो है कि जब आंखें ना पहचान पाएं तो दिल ही है जो कुछ इल्म रखता है कि क्या है जिससे तुम रूबरू हो!
एक आवाज़ होती है हमेशा कहीं दूर दिल में जो बता रही होती है कि ऐसा कर ले!, मगर फिर भी हैम वो कर बैठते हैं जो दिल ने गवाही नहीं दी करने को।
शायद हम बिल्कुल नई चाहते उस आवाज़ को सुनना मगर सच तो ये है कि ज़्यादातर वो अंदरूनी आवाज़ शायद हमारी आंखों से भी बेहतर देख पा रही होती है...दिल है।
कर लिया अगर यकीन थोड़ा सा और थोड़ा वक़्त अगर ले लिया कुछ चीज़ों को अंजाम देने से पहले तो शायद बेहतर हो जाये आने वाला वक़्त !